31 मार्च 2020 - 13:05
कोरोना ने खोली पोल... कहां जा रही है 3.6 ट्रिलियन डालर की वह रक़म जो हर साल अमरीका हेल्थ सेक्टर पर ख़र्च करता है?!

न्यूयार्क शहर के मैनहटन इलाक़े के अस्पताल की तीन नर्सों की एक तसवीर दुनिया भर में वायरल हो गई जिसमें तीनों ने कोरोना से बचने के लिए विशेष ड्रेस की जगह कूड़ा रखने के लिए प्रयोग होने वाली प्लास्टिक पहन रखी थी।

नर्सों का कहना था कि प्रोटेक्टिव ड्रेस अस्पताल में मौजूद नहीं था जिसके कारण उन्हें प्लास्टिक पहननी पड़ी। इस तसवीर से अमरीका के हेल्थ सेक्टर को लेकर बहुत से सवाल खड़े हो गए।

कहा तो यह जाता है कि चिकित्सा विज्ञान में अमरीका दुनिया भर में पहले नंबर पर है जहां दुनिया के सबसे अच्छे और आवश्यक सुविधाओं से लैस अस्पताल हैं।

अमरीका चिकित्सा शोध के क्षेत्र में भी बहुत आगे है इसलिए दुनिया भर से शोधकर्ता और वैज्ञानिक वहां के विश्वविद्यालयों और शोध केन्द्रो में जाकर शोध करने की तमन्ना रखते हैं।

अमरीका ने पिछले साल अपने हेल्थ सेक्टर पर 3.6 ट्रिलियन डालर ख़र्च किए थे जो अमरीका की जीडीपी का 17 प्रतिशत है।

मगर कोरोना वायरस की महामारी अमरीका में फैली तो यह सच्चाई सारी दुनिया के सामने आ गई कि अमरीका इतने बड़े बजट के बावजूद महामारी से निपटने के लिए तैयार नहीं है।

अमरीकियों का कहना है कि इस देश में तो वह सामान्य चिकित्सा उपकरण और साधन भी नहीं है जिन्हें बनाने के लिए किसी जटिल तकनीक की भी ज़रूरत नहीं होती।

हेल्थ सेक्टर में काम करने वालों को मास्क और दस्ताने भी नहीं मिल पा रहे हैं। वैंटीलेटर मशीनों की तो भारी कमी पड़ गई है।

इस सवाल का जवाब बहुत कठिन है कि अमरीका महामारी का मुक़ाबला क्यों नहीं कर पा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि इसका राजनैतिक कारण भी है क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने कोरोना के संबंध में मिलने वाली चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और बड़े पैमाने पर महामारी फैलने की स्थिति का सामना करने के लिए ख़ुद को तैयार नहीं किया।

एक समस्या यह भी है कि प्राथमिकताओं की सही तरह दर्जाबंदी नहीं की जाती जिसके नतीजे में बजट का बहुत बड़ा हिस्सा उन चीज़ों पर ख़र्च हो जाता है जो अमरीका की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं नहीं हैं।

वाशिंग्टन के एक डाक्टर ने अलजज़ीरा डाट नेट से बातचीत में कहा कि हमारी समझ में नहीं आता कि ज़रूरी चीज़ों का स्ट्रैटेजिक भंडार क्यों नहीं है जो महामारी जैसी परिस्थितियों में काम आती हैं।

डाक्टर का कहना था कि बात दरअस्ल यह है कि सारे फ़ैसले मुनाफ़ाख़ोरी की बुनियाद पर किए जाते हैं। भारी मात्रा में दवाएं चीन से मंगाई जाती हैं।

चिकित्सा विभाग के अधिकारी 2.1 ट्रिलियन डालर की रक़म दवाओं पर ख़र्च कर देते हैं। 540 बिलियन डालर अस्पतालों, डाक्टरों और नर्सों पर ख़र्च किए जाते हैं। 800 अरब डालर चिकित्सा उपकरणों पर ख़र्च किए जाते हैं। 160 अरब डालर अन्य चीज़ों पर ख़र्च किए जाते हैं।

1.8 ट्रिलियन डालर फ़ेडरल सरकार मुहैया कराती है, 1 ट्रिलियन डालर देशवासियों से लिए जाते हैं जबकि 1 ट्रिलियन डालर से कम रक़म कारपोरेट सेक्टर से लिया जाता है।

वर्जीनिया में काम करने वाली एक महिला चिकित्सक ने बताया कि यह आम सोच है कि अमरीका में डाक्टरों और नर्सों को अच्छी तनख्वाहें मिलती होंगी लेकिन यह सही नहीं है, सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा दवासाज़ कंपनियां और बीमा कंपनियां कमाती हैं।

अमरीका में सारे देश वासियों के लिए चिकित्सा बीमा की सुविधा नहीं है जबकि सारे विकसित देशों में नागरिकों को यह सुविधा दी गई है।

स्रोतः अलजज़ीरा डाट नेट